सेवा भारती जयपुर (भाग 4) के 40 प्रकल्पों के वार्षिकोत्सव ने मनमोहा

सेवा भारती जयपुर,भाग 4 के 40 प्रकल्पों के वार्षिकोत्सव का दृश्य:: कुल 700 उपस्थिति रही
सेवा भारती जयपुर,भाग 4 के 40 प्रकल्पों के वार्षिकोत्सव दिनांक 08/02/2016:: कुल 700 उपस्थिति रही

जयपुर। सेवा भारती जयपुर महानगर के 40 सेवा प्रकल्पों के सामूहिक वार्षिकोत्सव में सेवा बस्तियों के बालक बालिकाओं ने समां बांध दिया।

रविवार को अंबाबाडी बालिका विद्यालय में आयोजित वाषिकोत्सव में एक से बढ़कर एक रंगारंग प्रस्तुतियां देकर सेवा बस्तियों के बच्चों ने बता दिया कि उनमें भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं, बस उन्हें अवसर की तलाश थी जो सेवा भारती के जरिए मिल गया है।

नन्हे बच्चों ने देशप्रेम, धर्म और सामाजिक सदभाव से ओतप्रोत संगीतमय प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों और अतिथियों को अचंभित कर दिया। ऐसे बच्चे जो कभी स्कूल नहीं गए, घर का वातावरण भी प्रतिकूल, अभाव के चलते जीवन कष्टप्रद, इन सबके बीच सकारात्मक सोच के साथ आगे बढऩे की जीजीविषा वार्षिकोत्सव में झलक रही थी।

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बच्चों द्वारा दी गई हर प्रस्तुति अभिनय की जीवंत रूप लिए हुए थी। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं, घर में शौचालय की आवश्यकता, सामाजिक कुरुतियों को मिटाने की कोशिश जैसे समाज सुधार के अभियानों को भी सेवा बस्तियों के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए जागरूकता भरे अंदाज में प्रस्तुत किया।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विराजित को समाज कल्याण मंत्री अरुण चतुर्वेंदी भी अभावग्रस्त और सेवा बस्तियों के बच्चों की प्रतिभा के कायल हो गए और उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक सदभाव बिगाडऩे के वातावरण के बीच सेवा भारती द्वारा देशभर में चलाए जा रहे हजारों सेवा कार्यों के जरिए सामाजिक समरसता का कार्य प्रभावी सिद्ध हो रहा है। ऐसे कार्यक्रमों में सहभागी बनने को सौभाग्य बिरले ही मिलता है।

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राजधानी की सेवा बस्तियों में सेवा प्रकल्प के जरिए सामाजिक समरसता का जो प्रयास चल रहा है उसका प्रभावी रूप ही आज इस वार्षिकोत्सव के जरिए हम सबके सामने हैं। वंचित, गरीब और अभावग्रस्त क्षेत्र के बच्चों में सक्षम परिवारों के बच्चों के समान प्रतिभा का बीजारोपण प्रस्फुटित हो रहा है।

समारोह के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक दुर्गाप्रसाद ने कहा कि अभाव की पूर्ति का नाम ही सेवा है और यह अभाव पूर्ति का काम सेवा भारती बखूबी कर रही है। सामाजिक विषमता को दूर कर समरसता का संदेश फैलाने का जो बीडा सेवा भारती ने उठाया हुआ है व अनुकरणीय है। खासकर समाज के वंचित, अभाव और गरीबी से जूझ रहे वर्ग को समाज की मुख्यधारा से जोडऩे का प्रयास जिस तरह सेवा भारती कर रही है उसका प्रभाव अब सामने आने लगा है।

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उन्होंने सेवा बस्तियों में चलाए जा रहे बाल संस्कार केन्द्रों की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि जहां विद्यार्थी स्कूल न जाएं वहां स्कूल को विद्याथियों तक जाना होगा। सेवा भारती इसी भाव के साथ बाल संस्कारों के जरिए अभावग्रस्त बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रही है। सेवा भारती समाज के सुदामा बंधुओं के पास खुद पहुंचती है, यही सच्ची सेवा है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष पवन गोयल व विशिष्ट अतिथि बजरंग लाल खेतान ने प्रस्तुति देने वाले बच्चों को प्रशस्ति पत्र और पारितोषित प्रदान करते हुए कहा कि सेवा भारती द्वारा महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सिलाई व कंप्यूटर प्रशिक्षण देना आज की आवश्यकता है।

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ये रही वार्षिकोत्सव की खास बात

वाषिकोत्सव में 40 सेवा प्रकल्पों के बच्चे प्रस्तुति देने के लिए तैयारी के साथ आए थे। प्रस्तुतियों की संख्या की अधिकता के चलते कार्यक्रम समय से पूर्व ही प्रारंभ हुआ और अतिथियों के जाने के बाद भी चलता रहा। बच्चों के उत्साह के आगे समय की सीमाए टूट गई। लेकिन बच्चों के बालमन को टूटने नहीं दिया गया।

देशभक्ति और भक्ति से ओतप्रोत गीत, संगीत, नृत्य और नाटिकाओं का अनूठा संगम वार्षिकोत्सव में झलक रहा था। बच्चों की प्रस्तुतियों को दर्शकों की वाहवाही मिली।

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वार्षिकोत्सव में बाल संस्कार केन्द्र, महिला सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र, कंप्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र से जुडे विद्यार्थियों ने देशभक्ति और भक्ति से ओतप्रोत गीत, संगीत, नृत्य और नाटिकाओं का अनूठी प्रस्तुतियां दी। हर प्रस्तुती को दर्शकों की वाहवाही मिली।

कार्यक्रम के प्रारंभ में 500 बच्चों ने सामूहिक रूप से दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, प्रार्थना और सहगीत की प्रस्तुति दी, एक ही स्वर और लय में दी जा रही प्रस्तुति ने दर्शकों के दिल को छू लिया।

महोत्सव का मुख्य आकर्षण गीत संगीत से सजी नृत्य नाटिका ’श्बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से समाज में हो रही भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों पर प्रहार किया तथा बेटियों को शिक्षित कर देश को मजबूत करने का सन्देश दिया। कार्यक्रम कासंचालन हनुमान भाटी ने किया तथा सेवा भारती का प्रतिवेदन कैलाश मित्तल ने प्रस्तुत किया।

 

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